एपिक्टेटस

ऐसे व्यवहार करो जैसे भोज में हो: जो तुम्हारे सामने परोसा जाए वह लो, और जो अभी नहीं आया उसकी ओर हाथ मत बढ़ाओ।

एपिक्टेटस, 50–135
ऐसे व्यवहार करो जैसे भोज में हो: जो तुम्हारे सामने परोसा जाए वह लो, और जो अभी नहीं आया उसकी ओर हाथ मत बढ़ाओ। — एपिक्टेटस

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