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छोटे और तीखे विचार, जो एक ही वाक्य में सब कुछ कह देते हैं।
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पराजितों की एकमात्र रक्षा यही है कि वे किसी रक्षा की आशा न करें।
जो समुद्र पार दौड़ते हैं, वे अपना आकाश बदलते हैं, अपनी आत्मा नहीं।
आत्म-सम्मान: यह निश्चिंत भावना कि अभी तक किसी को शक नहीं हुआ।
सफल मनुष्य बस वह है जो एक ही तरह से लगातार दो-तीन बार से अधिक अपनी हँसी नहीं उड़वाता।
हर असफलता मनुष्य को कुछ सिखाती है। जैसे यह कि अगली बार भी वह शायद असफल होगा।
सभ्यता ईश्वर की भूलों को सुधारने और उसके मज़ाक़ों पर रोक लगाने का साझा प्रयास है।
यह मानना कठिन है कि कोई मनुष्य सच बोल रहा है, जब तुम जानते हो कि उसकी जगह तुम झूठ बोलते।