योवान दुचिच

आप जीवन के बारे में जितना सोचते हैं, उसकी घातें उतनी ही खुलती हैं और उसके बीहड़ उतने ही दिखते हैं।

योवान दुचिच, 1871–1943
आप जीवन के बारे में जितना सोचते हैं, उसकी घातें उतनी ही खुलती हैं और उसके बीहड़ उतने ही दिखते हैं। — योवान दुचिच

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