टेकुमसेह

देश बेचना! तो फिर हवा, बादल और महासागर को भी क्यों नहीं बेच देते, जैसे धरती को?

टेकुमसेह, 1768–1813
देश बेचना! तो फिर हवा, बादल और महासागर को भी क्यों नहीं बेच देते, जैसे धरती को? — टेकुमसेह

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