दोसितेय ओब्रादोविच

समझदार मनुष्य को उस काम में दख़ल देने में शर्म आती है जिसमें वह निपुण नहीं, जबकि मूर्ख को यह बड़ी शर्म की बात लगती है कि वह हर जगह अपनी नाक न घुसाए।

दोसितेय ओब्रादोविच, 1739–1811
समझदार मनुष्य को उस काम में दख़ल देने में शर्म आती है जिसमें वह निपुण नहीं, जबकि मूर्ख को यह बड़ी शर्म की बात लगती है कि वह हर जगह अपनी नाक न घुसाए। — दोसितेय ओब्रादोविच

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