डायोजनीज़

तुमने दर्शन से क्या पाया? — और कुछ नहीं तो इतना तो: हर भाग्य के लिए तैयार रहना।

डायोजनीज़, 412–323 ई.पू.
तुमने दर्शन से क्या पाया? — और कुछ नहीं तो इतना तो: हर भाग्य के लिए तैयार रहना। — डायोजनीज़

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