मिशेल द मॉन्तेन

मिशेल द मॉन्तेन

1533–1592 4 प्रविष्टियाँ

जीवनी

मिशेल द मॉन्तेन फ़्रांसीसी लेखक और दार्शनिक थे, और निबंध विधा के आविष्कारक। उनका जन्म 1533 में पेरिगोर के मॉन्तेन महल में हुआ, और उनके पिता ने उन्हें फ़्रांसीसी से पहले लैटिन सिखवाई, जिससे लैटिन उनकी पहली भाषा बन गई। उन्होंने क़ानून पढ़ा और लगभग तेरह वर्ष बोर्दो की संसद में मजिस्ट्रेट रहे, जहाँ लेखक एत्येन द ला बोएसी से उनकी गहरी मित्रता हुई, जिसके बारे में उन्होंने बाद में लिखा: “क्योंकि वह वह था, क्योंकि मैं मैं था।”

1571 में वे पढ़ने, सोचने और लिखने के लिए अपने महल की मीनार के पुस्तकालय में चले गए, और 1580 में उन्होंने अपने निबंधों की पहली पुस्तकें प्रकाशित कीं, जिन्हें वे मृत्यु तक बढ़ाते रहे। इनमें वे स्वयं को अपना विषय बनाते हैं, अपने संदेहों, आदतों और विरोधाभासों को देखते हैं, और एक मनुष्य में मानवीय दशा का पूरा रूप पाते हैं। उनका आदर्श वाक्य यह प्रश्न था: “मैं क्या जानता हूँ?”, और उनकी खुली, संदेहशील और मानवीय आवाज़ ने शेक्सपियर, पास्कल, देकार्त, एमर्सन और नीत्शे को प्रभावित किया। दो बार बोर्दो के महापौर चुने गए मॉन्तेन की 1592 में अपने महल में मृत्यु हो गई।

  • उद्धरण 4