कर्मरत अज्ञान से अधिक भयानक कुछ नहीं।
कर्मरत अज्ञान से अधिक भयानक कुछ नहीं।
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जो विदेशी भाषाएँ नहीं जानता, वह अपनी भाषा के बारे में कुछ नहीं जानता।
जानना काफ़ी नहीं, लागू भी करना चाहिए। चाहना काफ़ी नहीं, करना भी चाहिए।
पराजितों की एकमात्र रक्षा यही है कि वे किसी रक्षा की आशा न करें।
जो समुद्र पार दौड़ते हैं, वे अपना आकाश बदलते हैं, अपनी आत्मा नहीं।