गुरु का मन किसी भी चीज़ पर एक क्षण के लिए भी नहीं रुकता।
गुरु का मन किसी भी चीज़ पर एक क्षण के लिए भी नहीं रुकता।
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कार्य करो, पर मन को हर चाल के बारे में सोचने में क़ैद मत होने दो।
यदि तुम अपनी आँख एक ही पत्ते पर टिका दोगे, तो बाक़ी सब नहीं देख पाओगे।
यदि तुम्हारा मन प्रतिद्वंद्वी की तलवार पर रुक जाता है, तो तुम कार्य करने की स्वतंत्रता खो देते हो।
किसी राजा और उसकी बुद्धि के बारे में पहली राय उसके आसपास के लोगों को देखकर बनती है।