सोरेन कीर्केगार्द

जीवन को केवल पीछे देखकर समझा जा सकता है, लेकिन उसे आगे की ओर ही जीना पड़ता है।

सोरेन कीर्केगार्द, 1813–1855
जीवन को केवल पीछे देखकर समझा जा सकता है, लेकिन उसे आगे की ओर ही जीना पड़ता है। — सोरेन कीर्केगार्द

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