जीवन को केवल पीछे देखकर समझा जा सकता है, लेकिन उसे आगे की ओर ही जीना पड़ता है।
जीवन को केवल पीछे देखकर समझा जा सकता है, लेकिन उसे आगे की ओर ही जीना पड़ता है।
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आप जीवन के बारे में जितना सोचते हैं, उसकी घातें उतनी ही खुलती हैं और उसके बीहड़ उतने ही दिखते हैं।
हर दर्शन उदास होता है। यदि आप देर तक सुख की बात करेंगे, तो अंत में स्वयं को थोड़ा दुखी महसूस करेंगे।