सुकरात

क्या तुम्हें लज्जा नहीं आती कि तुम धन, यश और सम्मान की चिंता करते हो, पर ज्ञान, सत्य और अपनी आत्मा की चिंता नहीं करते?

सुकरात, 470–399 ई.पू.
क्या तुम्हें लज्जा नहीं आती कि तुम धन, यश और सम्मान की चिंता करते हो, पर ज्ञान, सत्य और अपनी आत्मा की चिंता नहीं करते? — सुकरात

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