मार्कस ऑरेलियस

लोग अपने लिए एकांत ढूँढ़ते हैं, गाँव में, समुद्र किनारे, पहाड़ों पर; और तुम भी ऐसी जगहों के लिए तरसते हो। पर यह सब निरा भोलापन है, क्योंकि तुम जब चाहो अपने भीतर लौट सकते हो।

मार्कस ऑरेलियस, 121–180
लोग अपने लिए एकांत ढूँढ़ते हैं, गाँव में, समुद्र किनारे, पहाड़ों पर; और तुम भी ऐसी जगहों के लिए तरसते हो। पर यह सब निरा भोलापन है, क्योंकि तुम जब चाहो अपने भीतर लौट सकते हो। — मार्कस ऑरेलियस

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