मार्कस ऑरेलियस

मार्कस ऑरेलियस

121–180 21 प्रविष्टियाँ

जीवनी

मार्कस ऑरेलियस 161 से 180 तक रोमन सम्राट और स्टोइक दार्शनिक थे, और तथाकथित पाँच अच्छे सम्राटों में अंतिम। रोम में जन्मे मार्कस को युवावस्था में शाही परिवार ने गोद लिया और अलंकारशास्त्र तथा दर्शन की सावधानी से शिक्षा दी। आरंभ में उन्होंने लूसियस वेरस के साथ शासन किया, और उनका राज्यकाल पूर्व में पार्थियनों से और डेन्यूब के किनारे जर्मन क़बीलों से युद्धों तथा एक भयंकर महामारी से त्रस्त रहा। उन्होंने अपने अंतिम वर्षों का बड़ा हिस्सा उत्तर में सैन्य अभियानों में बिताया।

शिविर में उन्होंने यूनानी में निजी टिप्पणियों की एक शृंखला लिखी, जिसे वे कभी प्रकाशित नहीं करना चाहते थे और जो अब मेडिटेशंस के नाम से जानी जाती है। इनमें वे स्वयं को याद दिलाते हैं कि जो बदला नहीं जा सकता उसे स्वीकार करो, अपना कर्तव्य करो और दूसरों से न्याय और धैर्य से पेश आओ। 180 में डेन्यूब पर एक अभियान के दौरान उनकी मृत्यु हो गई, और उनकी मेडिटेशंस आज भी दर्शन की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली पुस्तकों में से एक है।

  • उद्धरण 21

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