मैं कभी उतना कम ख़ाली नहीं होता जितना ख़ाली समय में, न उतना कम अकेला जितना अकेले में।
मैं कभी उतना कम ख़ाली नहीं होता जितना ख़ाली समय में, न उतना कम अकेला जितना अकेले में।
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कलाकार का उद्देश्य सुंदर की रचना है। सुंदर क्या है, यह दूसरा प्रश्न है।
अपने को दार्शनिक मत कहो; अपने सिद्धांत अपने कर्मों से दिखाओ।