मैं उसकी सेवा नहीं करूँगा जिसमें अब मेरा विश्वास नहीं, चाहे वह स्वयं को मेरा घर कहे, मेरी मातृभूमि या मेरा चर्च।
मैं उसकी सेवा नहीं करूँगा जिसमें अब मेरा विश्वास नहीं, चाहे वह स्वयं को मेरा घर कहे, मेरी मातृभूमि या मेरा चर्च।
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कलाकार का उद्देश्य सुंदर की रचना है। सुंदर क्या है, यह दूसरा प्रश्न है।
अभी को, यहाँ को थामे रहो, जिनसे होकर सारा भविष्य अतीत में उतर जाता है।