जेम्स जॉयस

एक-एक करके वे सब छायाएँ बनते जा रहे थे। उम्र के साथ उदास होकर मुरझाने और धुँधला पड़ने से अच्छा है किसी भावना की पूरी चमक में साहस से उस दूसरी दुनिया में चले जाना।

जेम्स जॉयस, 1882–1941
एक-एक करके वे सब छायाएँ बनते जा रहे थे। उम्र के साथ उदास होकर मुरझाने और धुँधला पड़ने से अच्छा है किसी भावना की पूरी चमक में साहस से उस दूसरी दुनिया में चले जाना। — जेम्स जॉयस

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