ज़ुआंगज़ी

मेरे जीवन की सीमा है, पर ज्ञान की कोई सीमा नहीं। सीमित से असीम के पीछे भागना ख़तरनाक है।

ज़ुआंगज़ी, 369–286 ई.पू.
मेरे जीवन की सीमा है, पर ज्ञान की कोई सीमा नहीं। सीमित से असीम के पीछे भागना ख़तरनाक है। — ज़ुआंगज़ी

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