मेरी भाषा की सीमाएँ मेरे संसार की सीमाएँ हैं।
इसी लेखक के और इनसे जुड़े विषयों पर।
जिसके बारे में बोला नहीं जा सकता, उसके बारे में चुप रहना चाहिए।
सुखी होने में कोई शर्म नहीं है।
संसार को समझने के लिए कभी-कभी उससे मुँह मोड़ना पड़ता है।
ऐसी कोई नियति नहीं जिसे तिरस्कार से जीता न जा सके।
विद्रोही क्या है? वह मनुष्य जो ना कहता है।
बहुत-से लोग शिकायत करते हैं कि उनका पूरा जीवन जीवन का अर्थ खोजने में बीत जाता है, जो, यदि है भी, तो खोज के सिवा और कहीं नहीं है।
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