मित्र क्या है? दो शरीरों में बसी एक आत्मा।
मित्र क्या है? दो शरीरों में बसी एक आत्मा।
इसी लेखक के और इनसे जुड़े विषयों पर।
मित्रों के बिना कोई जीना नहीं चुनेगा, चाहे उसके पास बाक़ी सब सुख हों।
हम न्यायपूर्ण कर्म करके न्यायी बनते हैं, संयमित कर्म करके संयमी और साहसी कर्म करके साहसी।