मित्रता प्रेम पाने से अधिक प्रेम करने में निहित लगती है।
मित्रता प्रेम पाने से अधिक प्रेम करने में निहित लगती है।
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मित्रों के बिना कोई जीना नहीं चुनेगा, चाहे उसके पास बाक़ी सब सुख हों।
हम न्यायपूर्ण कर्म करके न्यायी बनते हैं, संयमित कर्म करके संयमी और साहसी कर्म करके साहसी।