एपिक्यूरस

मृत्यु हमारे लिए कुछ भी नहीं है, क्योंकि जब हम हैं तब मृत्यु नहीं है, और जब मृत्यु है तब हम नहीं हैं।

एपिक्यूरस, 341–270 ई.पू.
मृत्यु हमारे लिए कुछ भी नहीं है, क्योंकि जब हम हैं तब मृत्यु नहीं है, और जब मृत्यु है तब हम नहीं हैं। — एपिक्यूरस

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