प्राचीन लोग सहज ही नहीं बोलते थे, क्योंकि उन्हें लज्जा होती थी कि कहीं उनके कर्म उनके शब्दों तक न पहुँच पाएँ।
प्राचीन लोग सहज ही नहीं बोलते थे, क्योंकि उन्हें लज्जा होती थी कि कहीं उनके कर्म उनके शब्दों तक न पहुँच पाएँ।
इसी लेखक के और इनसे जुड़े विषयों पर।
क्या सीखना और समय आने पर सीखे हुए का अभ्यास करना आनंद की बात नहीं है?
श्रेष्ठ व्यक्ति का मन धर्म को समझता है; नीच व्यक्ति का मन लाभ को।