बारूख़ स्पिनोज़ा

सभी उत्कृष्ट वस्तुएँ जितनी दुर्लभ होती हैं उतनी ही कठिन भी।

बारूख़ स्पिनोज़ा, 1632–1677
सभी उत्कृष्ट वस्तुएँ जितनी दुर्लभ होती हैं उतनी ही कठिन भी। — बारूख़ स्पिनोज़ा