प्लेटो

विस्मय दार्शनिक का भाव है, और दर्शन विस्मय से ही आरंभ होता है।

प्लेटो, 428–348 ई.पू.
विस्मय दार्शनिक का भाव है, और दर्शन विस्मय से ही आरंभ होता है। — प्लेटो

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