चापलूसी मूर्खों का भोजन है।
चापलूसी मूर्खों का भोजन है।
इसी लेखक के और इनसे जुड़े विषयों पर।
व्यंग्य एक प्रकार का दर्पण है जिसमें देखने वाले प्रायः अपने सिवा सबका चेहरा देखते हैं।
तर्क किसी मनुष्य से वह ग़लत राय नहीं छुड़वा सकता, जो उसने तर्क से पाई ही नहीं।
मुझे लोगों को दुष्ट देखकर कभी आश्चर्य नहीं होता, पर उन्हें लज्जित न देखकर अक्सर होता है।
हमारे पास घृणा करने भर का धर्म है, पर एक-दूसरे से प्रेम करने भर का नहीं।