जोनाथन स्विफ़्ट

झूठ उड़ता है, और सत्य लँगड़ाता हुआ उसके पीछे आता है।

जोनाथन स्विफ़्ट, 1667–1745
झूठ उड़ता है, और सत्य लँगड़ाता हुआ उसके पीछे आता है। — जोनाथन स्विफ़्ट

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