देशभक्ति दुष्ट का अंतिम आश्रय है।
देशभक्ति दुष्ट का अंतिम आश्रय है।
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पराजितों की एकमात्र रक्षा यही है कि वे किसी रक्षा की आशा न करें।
जो समुद्र पार दौड़ते हैं, वे अपना आकाश बदलते हैं, अपनी आत्मा नहीं।
आत्म-सम्मान: यह निश्चिंत भावना कि अभी तक किसी को शक नहीं हुआ।
यह मानना कठिन है कि कोई मनुष्य सच बोल रहा है, जब तुम जानते हो कि उसकी जगह तुम झूठ बोलते।