फ़्रेडरिक नीत्शे

यदि तुम देर तक खाई में झाँकते हो, तो खाई भी तुममें झाँकती है।

फ़्रेडरिक नीत्शे, 1844–1900
यदि तुम देर तक खाई में झाँकते हो, तो खाई भी तुममें झाँकती है। — फ़्रेडरिक नीत्शे

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