चरित्र ही मनुष्य की नियति है।
इसी लेखक के और इनसे जुड़े विषयों पर।
युद्ध सबका पिता और सबका राजा है।
प्रकृति को छिपना प्रिय है।
ऊपर का रास्ता और नीचे का रास्ता एक ही है।
तुम एक ही नदी में दो बार नहीं उतर सकते।
सुखी होने में कोई शर्म नहीं है।
बहुत-से लोग शिकायत करते हैं कि उनका पूरा जीवन जीवन का अर्थ खोजने में बीत जाता है, जो, यदि है भी, तो खोज के सिवा और कहीं नहीं है।
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