प्रकृति को छिपना प्रिय है।
इसी लेखक के और इनसे जुड़े विषयों पर।
युद्ध सबका पिता और सबका राजा है।
ऊपर का रास्ता और नीचे का रास्ता एक ही है।
चरित्र ही मनुष्य की नियति है।
तुम एक ही नदी में दो बार नहीं उतर सकते।
यहाँ किसी भी मनुष्य का ज्ञान उसके अनुभव से आगे नहीं जा सकता।
शून्य से कुछ भी उत्पन्न नहीं हो सकता।
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