सेनेका

हम वास्तविकता से अधिक कल्पना में कष्ट भोगते हैं।

सेनेका, 4 ई.पू.–65 ई.
हम वास्तविकता से अधिक कल्पना में कष्ट भोगते हैं। — सेनेका

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