कहा गया है कि लोकतंत्र शासन का सबसे बुरा रूप है, सिवाय उन सभी अन्य रूपों के जिन्हें समय-समय पर आज़माया गया है।
कहा गया है कि लोकतंत्र शासन का सबसे बुरा रूप है, सिवाय उन सभी अन्य रूपों के जिन्हें समय-समय पर आज़माया गया है।
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यह अंत नहीं है। यह अंत की शुरुआत भी नहीं है। पर शायद यह शुरुआत का अंत है।
मानव संघर्ष के क्षेत्र में इतने अधिक लोग इतने कम लोगों के इतने अधिक ऋणी कभी नहीं रहे।
मेरे पास देने को रक्त, परिश्रम, आँसू और पसीने के सिवा कुछ नहीं है।
युद्ध का प्रचार अंततः मनुष्यों की जगह शैतानी अमूर्तताओं को रखने तक सिमट जाता है।
प्रचारक का उद्देश्य लोगों के एक समूह को यह भुला देना है कि कुछ दूसरे समूहों के लोग भी मनुष्य हैं।