मेरे पास देने को रक्त, परिश्रम, आँसू और पसीने के सिवा कुछ नहीं है।
मेरे पास देने को रक्त, परिश्रम, आँसू और पसीने के सिवा कुछ नहीं है।
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यह अंत नहीं है। यह अंत की शुरुआत भी नहीं है। पर शायद यह शुरुआत का अंत है।
मानव संघर्ष के क्षेत्र में इतने अधिक लोग इतने कम लोगों के इतने अधिक ऋणी कभी नहीं रहे।
यदि हम मैसेडोनिया में आराम से बैठे रहते, तो कौन-सा महान या गौरवपूर्ण काम कर पाते?