क्या तुम्हें लज्जा नहीं आती कि तुम अपना मन हर मिलने वाले के वश में दे देते हो, कि वह गाली दे तो मन विचलित और व्याकुल हो जाए?
क्या तुम्हें लज्जा नहीं आती कि तुम अपना मन हर मिलने वाले के वश में दे देते हो, कि वह गाली दे तो मन विचलित और व्याकुल हो जाए?
इसी लेखक के और इनसे जुड़े विषयों पर।
शरीर पर बहुत अधिक समय मत लगाओ; तुम्हारी मुख्य चिंता मन होना चाहिए।
यदि तुम आगे बढ़ना चाहते हो, तो दूसरों की नज़र में मूर्ख समझे जाने से संतुष्ट रहो।