मनुष्य अपने आप में जो है, जो अकेले में उसके साथ रहता है, जिसे कोई न दे सकता है न छीन सकता है, वह उसके लिए उस सबसे अधिक आवश्यक है जो उसके पास है या जो वह दूसरों की नज़र में हो सकता है।
मनुष्य अपने आप में जो है, जो अकेले में उसके साथ रहता है, जिसे कोई न दे सकता है न छीन सकता है, वह उसके लिए उस सबसे अधिक आवश्यक है जो उसके पास है या जो वह दूसरों की नज़र में हो सकता है।
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बहुत दुखी न होने का सबसे सुरक्षित तरीक़ा है बहुत सुखी होने की अपेक्षा न करना।
मनुष्य जो है, वह उसके सुख में उससे कहीं अधिक योगदान देता है जो उसके पास है।