साध्य साधनों को उचित नहीं ठहरा सकता, इस सरल और स्पष्ट कारण से कि प्रयुक्त साधन ही प्राप्त साध्यों का स्वरूप तय करते हैं।
साध्य साधनों को उचित नहीं ठहरा सकता, इस सरल और स्पष्ट कारण से कि प्रयुक्त साधन ही प्राप्त साध्यों का स्वरूप तय करते हैं।
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युद्ध का प्रचार अंततः मनुष्यों की जगह शैतानी अमूर्तताओं को रखने तक सिमट जाता है।
प्रचारक का उद्देश्य लोगों के एक समूह को यह भुला देना है कि कुछ दूसरे समूहों के लोग भी मनुष्य हैं।
मन जितना शक्तिशाली और मौलिक होता है, उतना ही एकांत के धर्म की ओर झुकता है।
तथ्य इसलिए अस्तित्व में रहना बंद नहीं कर देते कि उन्हें अनदेखा किया जाता है।
यह कि मनुष्य इतिहास के सबक़ों से बहुत कुछ नहीं सीखते, इतिहास के सभी सबक़ों में सबसे महत्वपूर्ण है।