कन्फ़्यूशियस

सज्जन को तब लज्जा आती है जब उसके शब्द उसके कर्मों से बड़े हो जाते हैं।

कन्फ़्यूशियस, 551–479 ई.पू.
सज्जन को तब लज्जा आती है जब उसके शब्द उसके कर्मों से बड़े हो जाते हैं। — कन्फ़्यूशियस

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