तुम्हें न भविष्य पीड़ा देता है न अतीत, केवल वर्तमान।
इसी लेखक के और इनसे जुड़े विषयों पर।
तुम्हारा हर कर्म, शब्द और विचार ऐसा हो जैसे तुम इसी क्षण जीवन से विदा हो सकते हो।
यही मत सोचो कि जीवन रोज़ घट रहा है और उसका थोड़ा ही भाग बचा है, बल्कि यह भी कि यह निश्चित नहीं कि बुद्धि चीज़ों को समझने लायक़ बलवान बनी रहेगी।
ऐसे मत जियो जैसे तुम्हें दस हज़ार वर्ष जीना है। मृत्यु तुम्हारे सिर पर है। जब तक जीवित हो, जब तक तुम्हारे वश में है, अच्छे बनो।
यह विचार छोड़ दो कि तुम दूसरों को कैसे लगोगे, और संतुष्ट रहो यदि तुम शेष जीवन अपनी प्रकृति के अनुसार जी सको।
मृत्यु का तिरस्कार मत करो, बल्कि उससे संतुष्ट रहो, क्योंकि वह भी उन चीज़ों में से एक है जो प्रकृति चाहती है।
जो तुम्हारे भाग्य में आया है उसे स्वीकार करो, और जिन लोगों के बीच तुम्हें रहना मिला है उनसे प्रेम करो, पर सच्चे मन से।
सभी उद्धरण