यही मत सोचो कि जीवन रोज़ घट रहा है और उसका थोड़ा ही भाग बचा है, बल्कि यह भी कि यह निश्चित नहीं कि बुद्धि चीज़ों को समझने लायक़ बलवान बनी रहेगी।
यही मत सोचो कि जीवन रोज़ घट रहा है और उसका थोड़ा ही भाग बचा है, बल्कि यह भी कि यह निश्चित नहीं कि बुद्धि चीज़ों को समझने लायक़ बलवान बनी रहेगी।
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तुम्हारा हर कर्म, शब्द और विचार ऐसा हो जैसे तुम इसी क्षण जीवन से विदा हो सकते हो।