गेओर्ग क्रिस्टोफ़ लिख़्टेनबर्ग
1742–1799 5 प्रविष्टियाँ
जीवनी
गेओर्ग क्रिस्टोफ़ लिख़्टेनबर्ग जर्मन भौतिक विज्ञानी, गणितज्ञ और व्यंग्यकार थे, और जर्मन भाषा के पहले महान सूक्तिकार। एक पादरी के सत्रह बच्चों में सबसे छोटे लिख़्टेनबर्ग का जन्म डार्मश्टाट के पास हुआ, और रीढ़ की वक्रता के कारण वे क़द में छोटे और कुबड़े रह गए। उन्होंने गॉटिंगेन विश्वविद्यालय में पढ़ाई की और वहीं जर्मनी के पहले प्रायोगिक भौतिकी के प्रोफ़ेसरों में से एक के रूप में पढ़ाया। प्रयोगों से भरे उनके व्याख्यान दूर-दूर से छात्रों को खींचते थे, और उनके आगंतुकों में अलेस्सांद्रो वोल्टा भी थे।
भौतिकी में उन्हें विद्युत विसर्जन के उन शाखित प्रतिरूपों के लिए याद किया जाता है जो आज भी लिख़्टेनबर्ग आकृतियाँ कहलाते हैं। उन्होंने व्यंग्यपूर्ण निबंध और विलियम हॉगार्थ की नक़्क़ाशियों पर टीकाएँ भी लिखीं। उनकी नोटबुकें, जिन्हें वे अपनी “रद्दी की किताबें” कहते थे, उनकी मृत्यु के बाद प्रकाशित हुईं, और उनकी तीखी, चंचल टिप्पणियों की प्रशंसा गोएथे, नीत्शे, टॉल्स्टॉय और आइंस्टाइन ने की। 1799 में गॉटिंगेन में उनकी मृत्यु हुई।
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