पुस्तक एक दर्पण है: यदि उसमें बंदर झाँके, तो उसमें से कोई प्रेरित नहीं झाँक सकता।
पुस्तक एक दर्पण है: यदि उसमें बंदर झाँके, तो उसमें से कोई प्रेरित नहीं झाँक सकता।
इसी लेखक के और इनसे जुड़े विषयों पर।
ज्ञान का पहला क़दम है सबको दोष देना; अंतिम, सबसे मेल कर लेना।
साधारण मन हमेशा प्रचलित राय और प्रचलित फ़ैशन के अनुरूप चलता है।
उसने आठ खंड लिखे हैं। इससे अच्छा होता कि वह आठ पेड़ लगाता या आठ बच्चे पैदा करता।
जिन लोगों के पास कभी समय नहीं होता, वे सबसे कम काम करते हैं।
आत्म-सम्मान: यह निश्चिंत भावना कि अभी तक किसी को शक नहीं हुआ।
यह मानना कठिन है कि कोई मनुष्य सच बोल रहा है, जब तुम जानते हो कि उसकी जगह तुम झूठ बोलते।