दूसरों के बारे में बुरा मानना पाप है, पर शायद ही कभी ग़लती।
दूसरों के बारे में बुरा मानना पाप है, पर शायद ही कभी ग़लती।
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आत्म-सम्मान: यह निश्चिंत भावना कि अभी तक किसी को शक नहीं हुआ।
यह मानना कठिन है कि कोई मनुष्य सच बोल रहा है, जब तुम जानते हो कि उसकी जगह तुम झूठ बोलते।
अंतरात्मा: वह भीतरी आवाज़ जो हमें चेताती है कि शायद कोई देख रहा हो।
सफल मनुष्य बस वह है जो एक ही तरह से लगातार दो-तीन बार से अधिक अपनी हँसी नहीं उड़वाता।
हर असफलता मनुष्य को कुछ सिखाती है। जैसे यह कि अगली बार भी वह शायद असफल होगा।