मित्रता का पवित्र भाव इतना मधुर, स्थिर, निष्ठावान और टिकाऊ होता है कि पूरे जीवन चलता है, बशर्ते उससे पैसे उधार देने को न कहा जाए।
मित्रता का पवित्र भाव इतना मधुर, स्थिर, निष्ठावान और टिकाऊ होता है कि पूरे जीवन चलता है, बशर्ते उससे पैसे उधार देने को न कहा जाए।
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नए विचार वाला मनुष्य तब तक सनकी है जब तक उसका विचार सफल नहीं हो जाता।
आदत आदत है, उसे कोई खिड़की से बाहर नहीं फेंक सकता, उसे एक-एक सीढ़ी फुसलाकर नीचे उतारना पड़ता है।
आइए, ऐसे जीने का प्रयास करें कि जब हम मरें, तो कफ़न-दफ़न करने वाला भी दुखी हो।
जो काम परसों भी उतनी ही अच्छी तरह कर सकते हो, उसे कल पर कभी मत टालो।
‘क्लासिक’: वह पुस्तक जिसकी लोग प्रशंसा करते हैं और जिसे पढ़ते नहीं।