मूर्खतापूर्ण निरंतरता छोटे मनों का हौआ है।
मूर्खतापूर्ण निरंतरता छोटे मनों का हौआ है।
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ज्ञान का पहला क़दम है सबको दोष देना; अंतिम, सबसे मेल कर लेना।
साधारण मन हमेशा प्रचलित राय और प्रचलित फ़ैशन के अनुरूप चलता है।
तर्क किसी मनुष्य से वह ग़लत राय नहीं छुड़वा सकता, जो उसने तर्क से पाई ही नहीं।