यदि सभी सार्वजनिक प्रश्न पासा फेंककर तय किए जाएँ, तो उनमें से पचास प्रतिशत सही तय होंगे। यह अभी के हमारे परिणाम से पाँच गुना बेहतर होगा।
यदि सभी सार्वजनिक प्रश्न पासा फेंककर तय किए जाएँ, तो उनमें से पचास प्रतिशत सही तय होंगे। यह अभी के हमारे परिणाम से पाँच गुना बेहतर होगा।
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आत्म-सम्मान: यह निश्चिंत भावना कि अभी तक किसी को शक नहीं हुआ।
सफल मनुष्य बस वह है जो एक ही तरह से लगातार दो-तीन बार से अधिक अपनी हँसी नहीं उड़वाता।
हर असफलता मनुष्य को कुछ सिखाती है। जैसे यह कि अगली बार भी वह शायद असफल होगा।
सभ्यता ईश्वर की भूलों को सुधारने और उसके मज़ाक़ों पर रोक लगाने का साझा प्रयास है।
यह मानना कठिन है कि कोई मनुष्य सच बोल रहा है, जब तुम जानते हो कि उसकी जगह तुम झूठ बोलते।