एक बिंदु के बाद लौटना संभव नहीं रहता। उसी बिंदु तक पहुँचना है।
एक बिंदु के बाद लौटना संभव नहीं रहता। उसी बिंदु तक पहुँचना है।
इसी लेखक के और इनसे जुड़े विषयों पर।
पुस्तक हमारे भीतर के जमे हुए समुद्र के लिए कुल्हाड़ी होनी चाहिए।
शीत के बीच मैंने आख़िरकार जाना कि मेरे भीतर एक अजेय ग्रीष्म है।
कठिनाइयों पर विजय पाना अस्तित्व के पूरे आनंद का अनुभव करना है।