तिन उयेविच

घमंड मत करो! तुम्हारे विचार केवल तुम्हारे नहीं हैं! वे दूसरों में जीते हैं।

तिन उयेविच, 1891–1955
घमंड मत करो! तुम्हारे विचार केवल तुम्हारे नहीं हैं! वे दूसरों में जीते हैं। — तिन उयेविच

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