हम अपने अच्छे दिनों को बिना ध्यान दिए निकल जाने देते हैं; जब बुरे दिन आते हैं तभी चाहते हैं कि वे लौट आएँ।
हम अपने अच्छे दिनों को बिना ध्यान दिए निकल जाने देते हैं; जब बुरे दिन आते हैं तभी चाहते हैं कि वे लौट आएँ।
इसी लेखक के और इनसे जुड़े विषयों पर।
जीवन के पहले चालीस वर्ष हमें मूल पाठ देते हैं; अगले तीस उस पर टीका देते हैं।