हर किसी को यह कहने का अधिकार है कि वह क्या सोचता है, पर ऐसा कोई क़ानून नहीं जो किसी को सुनने के लिए विवश करे।
हर किसी को यह कहने का अधिकार है कि वह क्या सोचता है, पर ऐसा कोई क़ानून नहीं जो किसी को सुनने के लिए विवश करे।
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हर सूदख़ोर और बदमाश कुछ सिक्कों में अपने लिए ‘महान जन-देशभक्त’ की उपाधि ख़रीद सकता था।
अपील: क़ानून में, एक और बार फेंकने के लिए पासों को फिर डिब्बे में डालना।
राजनेता: उस बुनियादी कीचड़ की एक ईल मछली जिस पर संगठित समाज का ढाँचा खड़ा है।