हारी हुई लड़ाई के सिवा कुछ भी जीती हुई लड़ाई से आधा भी उदास नहीं होता।
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युद्ध का प्रचार अंततः मनुष्यों की जगह शैतानी अमूर्तताओं को रखने तक सिमट जाता है।